ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

अलख पुरुष की आरसी….


संत श्री आसाराम जी बापू के सत्संग-प्रवचन से संत कबीर से किसी ने पूछाः “हम निर्गुण-निराकार परमात्मा को तो नहीं देख सकते, फिर भी देखे बिना न रह जायें ऐसा कोई उपाय बताइये।” कबीर जी ने कहाः अलख पुरुष की आरसी, साधु का ही देह। लखा जो चाहे अलख को, इन्हीं में तू लख लेह।। …

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सनातन धर्म की महिमा


  संत श्री आसाराम जी बापू के सत्संग-प्रवचन से सनातन धर्म की स्थापना किसी साधु-संत, जती-जोगी या तपस्वी ने की, ऐसी बात नहीं है। यहाँ तक कि भगवान श्रीराम, श्रीकृष्ण या अन्य अवतारों ने भी सनातन धर्म की स्थापना नहीं की बल्कि श्रीराम और श्रीकृष्ण जैसी विभूतियाँ सनातन धर्म में प्रकट हुईं। सनातन धर्म तो …

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शम ही परम आनंद है…..


  संत श्री आसाराम जी बापू के सत्संग-प्रवचन से श्री वशिष्ठजी महाराज कहते हैं- “हे राम जी, शम ही परम आनंद, परम पद और शिवपद है। जिस पुरुष ने शम को पाया है सो संसार-समुद्र से पार हुआ है। उसके शत्रु भी मित्र हो जाते हैं। हे राम जी ! जैसे चंद्र उदय होता है …

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