ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

“शहर को महामारियों से बचाना असम्भव था लेकिन…”


लोभी धन का चिंतन करता है, मोही परिवार का, कामी कामिनी का, भक्त भगवान का चिंतन करता है किंतु ज्ञानवान महापुरुष ऐसे परम पद को पाये हुए होते हैं कि वे परमात्मा का भी चिंतन नहीं करते क्योंकि परमात्मस्वरूप के ज्ञान से वे परमात्ममय हो जाते हैं । उनके लिए परमात्मा निजस्वरूप से भिन्न नहीं …

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इच्छा बदलने से भगवत्प्राप्ति-साँईँ श्री लीलाशाहजी महाराज


दुनिया के व्यवसायों, धन इकट्ठा करने, सम्मान प्राप्त करने आदि के लिए आप क्या-क्या नहीं करते ! जान की बाजी लगाने से भी नहीं चूकते । जबकि यह स्पष्ट जानते हैं कि यह सब हमारे साथ नहीं चलेगा, अंत में काम नहीं आयेगा । यदि आप चाहें तो भगवत्प्राप्ति भी कर सकते हैं, जो इस …

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सद्गुरु के शब्दमात्र से उद्धार होता है – संत दादू दयालजी


सद्गुरु के चरणों में सिर नवाकर अर्थात् उनकी शरण में रहने एवं भगवन्नाम का उच्चारण व जप करते रहने से प्राणी दुस्तर संसार से  पार हो जाता है । वह अनायास ही अष्टसिद्धि, नवनिधि और अमर-अभय पद को प्राप्त कर लेता है । उसे भक्ति-मुक्ति सहज में ही प्राप्त हो कर वह वैकुंठ को (यहाँ …

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