ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

ब्रह्मज्ञान की महिमा


संत श्री आशाराम जी बापू के सत्संग-प्रवचन से लभन्ते ब्रह्मनिर्वाणमृषयः क्षीणकल्मषाः। छिन्नद्वेधा यतात्मानः सर्वभूतहिते रताः।। ‘जिनके सब पाप नष्ट हो गये हैं, जिनके सब संशय ज्ञान के द्वारा निवृत्त हो गये हैं, जो संपूर्ण प्राणियों के हित में रत हैं और जिनका जीता हुआ मन निश्चलभाव से परमात्मा में स्थित है, वे ब्रह्मवेत्ता पुरुष शान्त …

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ठीक अभ्यास करें


संत श्री आसारामजी बापू के सत्संग-प्रवचन से अभ्यासयोगेनयुक्तेन चेतसा नान्यगामिना। परमं पुरुषं दिव्यं याति  पार्थानुचिन्तयन्।। ‘हे पार्थ ! परमेश्वर के ध्यान के अभ्यासरूप योग से युक्त, दूसरी ओर न जाने वाले चित्त से निरन्तर चिन्तन करता हुआ मनुष्य परम प्रकाशरूप दिव्य पुरुष को अर्थात् परमेश्वर को ही प्राप्त होता है।’ (गीताः 8.8) अभ्यास तो सब …

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समय बड़ा बलवान….


संत श्री आसाराम जी बापू के सत्संग-प्रवचन से श्रीकृष्ण के स्वधामगमन के बाद अर्जुन उनकी आज्ञा के अनुसार द्वारिका से यदुवंश की स्त्रियों, वृद्धों एवं बच्चों को लेकर इन्द्रप्रस्थ की ओर चल पड़े। चलते-चलते बुद्धिमान एवं सामर्थ्यशाली अर्जुन ने अत्यंत समृद्धशाली पंचनद देश (पंजाब) में पहुँचकर पड़ाव डाला। एकमात्र अर्जुन के संरक्षण में ले जायी …

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