ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

जन्म कर्म चे मे दिव्यम्….


संत श्री आसाराम जी बापू के सत्संग प्रवचन से गीता में भगवान कहते हैं- जन्म कर्म चे मे दिव्यमेवं यो वेत्ति तत्त्वतः। व्यक्त्वा देहं पुनर्जन्म नैति मामेति सोsर्जुन।। ‘हे अर्जुन ! मेरे जन्म और कर्म दिव्य अर्थात् निर्मल और अलौकिक हैं – इस प्रकार जो मनुष्य तत्त्व से मुझे जान लेता है, वह शरीर को …

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ज्ञानी का पूजन


संत श्री आसारामजी बापू के सत्संग-प्रवचन से दो प्रकार के मनुष्य होते हैं- आस्तिक और नास्तिक आस्तिक एक की शरण लेता है जबकि  नास्तिक को हजारों की शरण लेनी पड़ती है। नास्तिक हजार-हजार जगह खुशामद करता है, फिर भी उसका बेड़ा गर्क हो जाता है जबकि आस्तिक केवल एक भगवान की शरण लेता है और …

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चारित्रिक क्रान्ति के उन्नायक पूज्य बापू


भारत की इस पावन धरा तथा ऋषियों के वंशजों पर भगवान की विशेष कृपा रही है। जब कभी भी इस भारत भूमि पर मानवजाति को किसी दुर्गुण ने ग्रसित किया, उसको पतनोन्मुख बनाने की कुचेष्टा की तब-तब यहाँ भगवान एवं भगवद् प्राप्त महापुरुषों का अवतरण होता रहा है। विश्व के किसी भी दूसरे देश में …

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