जन्म कर्म चे मे दिव्यम्….
संत श्री आसाराम जी बापू के सत्संग प्रवचन से गीता में भगवान कहते हैं- जन्म कर्म चे मे दिव्यमेवं यो वेत्ति तत्त्वतः। व्यक्त्वा देहं पुनर्जन्म नैति मामेति सोsर्जुन।। ‘हे अर्जुन ! मेरे जन्म और कर्म दिव्य अर्थात् निर्मल और अलौकिक हैं – इस प्रकार जो मनुष्य तत्त्व से मुझे जान लेता है, वह शरीर को …