ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

आत्मसंयम


जिसने जीभ को नहीं जीता वह विषय वासना को नहीं जीत सकता। मन में सदा यह भाव रखें कि हम केवल शरीर के पोषण के लिए ही खाते हैं, स्वाद के लिए नहीं। जैसे पानी प्यास बुझाने के लिए पीते हैं वैसे ही अन्न केवल भूख मिटाने के लिए ही खाना चाहिए। हमारे माँ बाप …

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आगे बढ़ो


मंत्र-दीक्षा-प्राप्त साधकों को संदेश संत श्री आसाराम जी बापू के सत्संग-प्रवचन से तुम्हें मंत्र दीक्षा के साथ मार्ग दर्शक सूचनाएँ भी मिल गयी हैं। अब आवश्यकता है केवल अभ्यास की। अभ्यास के बिना दीक्षा का पूरा लाभ नहीं मिल पाता। अब मार्ग मिल ही गया है ईश्वर की और जाने का, तो वीरतापूर्वक आगे बढ़ो। …

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सुख-दुःख में स्वस्थ रहें…


संत श्री आसाराम जी बापू के सत्संग-प्रवचन से श्रीमद् भगवदगीता में आता हैः समदुःखसुखः स्वस्थः समलोष्टाश्मकाञ्चनः। तुल्यप्रियाप्रियो धीरस्तुल्यनिन्दात्मसंस्तुतिः।। ʹजो निरन्तर आत्म भाव में स्थित, दुःख-सुख को समान समझने वाला, मिट्टी, पत्थर और स्वर्ण में समान भाववाला, ज्ञानी, प्रिय तथा अप्रिय को एक-सा मानने वाला और अपनी निन्दा स्तुति में समान भाववाला है (ऐसा पुरुष गुणातीत …

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