गाजर
गाजर को उसके प्राकृतिक रूप में ही अर्थात् कच्चा खाने से ज्यादा लाभ होता है। उसके भीतर का पीला भाग निकालकर खाना चाहिए क्योंकि वह अत्यधिक गरम होता है अतः पित्त दोष, वीर्यदोष एवं छाती में दाह उत्पन्न करता है। गाजर स्वाद में मधुर-कसैली-कड़वी, तीक्ष्ण, स्निग्ध, उष्णवीर्य, गरम, दस्त को बाँधने वाली, मूत्रल, हृदय के …