ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

संतकृपा से चित्रकेतु का मोहभंग


संत श्री आसारामजी बापू के सत्संग-प्रवचन से सदगुरु मेरा शूरमा, करे शब्द की चोट। मारे गोला प्रेम का, हरे भरम की कोट।। ʹमैं शरीर हूँ… यह मेरा नाम है… यह मेरी नात-जात है…. यह मेरी पत्नी है… यह मेरा पुत्र-परिवार है…. यह मेरा कर्त्तव्य है….ʹ ये सब भरम हमारे अंदर घुस गये हैं। ʹहम जी …

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शिवजी का अनोखा वेशः देता है दिव्य संदेश


महाशिवरात्रि दिनांक 4 मार्च 2000 संत श्री आसारामजी बापू के सत्संग-प्रवचन से यस्यांकि य विभाति भूधरसुता देवापगा मस्तके। भाले बालविधुर्गले च गरलं यस्योरसि व्यालराट्। सोઽयं भूतिविभूषणः सुरवरः सर्वाधिपः सर्वदा। शर्वः सर्वगतः शिवः शशिनिभः श्रीशंकरः पातु माम्।। ʹजिनकी गोद में हिमाचलसुता पार्वतीजी, मस्तक पर गंगाजी, ललाट पर द्वितीया का चंद्रमा, कंठ में हलाहल विष और वक्षःस्थल …

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मन एक कल्पवृक्ष


मन के साथ यदि मित्रता की जाये, विवेक से उसे उच्च लक्ष्य की ओर मोड़ा जाये तो वह बड़ा लाभ दे सकता है और यदि उसकी अधीनता स्वीकार करके, उसके कहे में आकर बह गये तो वह वह मन बड़ी हानि भी पहुँचा सकता है। इसीलिए शास्त्रों ने कहा हैः मनः एव मनुष्याणां कारणं बंधमोक्षयोः। …

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