ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

महर्षि कर्दम एवं देवहूति का दिव्य चरित्र


संत श्री आसाराम जी बापू के सत्संग-प्रवचन से धर्मस्य ह्यावर्ग्यस्य नार्थोઽर्थायोपकल्पते। नार्थस्य धर्मैकान्तस्य कामो लाभाय ही स्मृतः।। कामस्य नेन्द्रियप्रीतिर्लाभो जीवेत यावता। जीवस्य तत्त्वजिज्ञासा नार्थो यश्चेह कर्मभिः।। (श्रीमद् भागवतः 1.2.9,10) ʹधर्म का फल है मोक्ष। उसकी सार्थकता अर्थ प्राप्ति में नहीं है। अर्थ केवल धर्म के लिए है। भोग-विलास उसका फल नहीं माना गया है। भोग …

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सदैव प्रसन्न रहने का परिणाम


मन में दो  बातें एक साथ नहीं रह सकतीं। जिस समय मन दुःखी होगा उस समय मन सुखी नहीं होगा। जिस मन सुखी होगा उस समय दुःखी नहीं होगा। इस तथ्य का लाभ उठाना चाहिए। कितना भी बड़ा भारी दुःख आ जाये, आप अपने मन में सुख भरने की कला सीख लो। अगर सुख भरने …

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सत्शिष्य के लक्षण


पूज्यपाद संत श्री आसारामजी बापू सत्शिष्य के लक्षण बताते हुए कहा है किः अमानमत्सरो दक्षो निर्ममो दृढ़सौहृदः। असत्वरोઽर्थजिज्ञासुः अनसूयुः अमोघवाक्।। ʹसत्शिष्य मान और मत्सर से रहित, अपने कार्य में दक्ष, ममतारहित, गुरु में दृढ़ प्रीति करने वाला, निश्चल चित्त वाला, परमार्थ का जिज्ञासु और ईर्ष्यारहित एवं सत्यवादी होता है।ʹ इस प्रकार के नवगुणों से जो …

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