ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

श्रीकृष्ण की गुरुसेवा


पूज्यपाद संत श्री आशारामजी बापू गुरु की महिमा अमाप है, अपार है। भगवान स्वयं भी लोककल्याणार्थ जब मानवरूप में अवतरित होते हैं तो गुरुद्वार पर जाते हैं। राम कृष्ण से कौन बड़ा, तिन्ह ने भी गुरु कीन्ह। तीन लोक के हैं धनी, गुरु आगे आधीन।। द्वापर युग में जब भगवान श्रीकृष्ण अवतरित हुए एवं कंस …

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भागवत प्रसाद


पूज्यपाद संत श्री आशाराम जी बापू कलियुगे के आदमी का जीवन कोल्हू के बैल जैसा है। उसके जीवन में कोई ऊँचा लक्ष्य नहीं है। किसी ने कलियुग के मानव की दशा पर कहा हैः पैसा मेरा परमेश्वर और पत्नी मेरी गुरु। लड़के-बच्चे शालिग्राम अब पूजा किसकी करूँ।। लोग इतने अल्प मति के हो गये हैं …

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गुरुवर को प्रणाम


चैतन्यं शाश्वतं शान्तं व्योमातीतं निरंजनम्। नादबिन्दुकलातीतं तस्मै श्रीगुरवे नमः।। ʹजो चैतन्य, शाश्वत, शांत, आकाश से परे हैं, इन्द्रियों से परे हैं, जो नाद, बिंदु और कला से परे हैं, उन श्रीगुरुदेव को प्रणाम हैं !ʹ यत्सत्येन जगत्सत्यं यत्प्रकाशेन विभाति यत्। यदानन्देन नन्दन्ति तस्मै श्रीगुरवे नमः।। ʹजिसके अस्तित्त्व से संसार का अस्तित्त्व है, जिसके प्रकाश से …

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