ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

गुरुद्वार पर कैसे रहें


पूज्यपाद संत श्री आसारामजी बापू श्री महाभारत में आता हैः न विना ज्ञानविज्ञाने मोक्षस्याधिगमो भवेत्। न विना गुरुसम्बन्धं ज्ञानस्याधिगमः स्मृतः।। गुरु प्लावयिता तस्य ज्ञानं प्लव इहोत्यते। विज्ञाय कृतकृत्यस्तु तीर्णस्तदुभयं त्यजेत्।। “जैसे ज्ञान विज्ञान के बिना मोक्ष प्राप्त नहीं हो सकता, उसी प्रकार सदगुरु से संबंध हुए बिना ज्ञान की प्राप्ति नहीं हो सकती। गुरु इस …

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गुरु की चाह


पूज्यपाद संत श्री आसारामजी बापू ऋषि कहते हैं- गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः। जो ब्रह्मा की नाईं हमारे हृदय में उच्च संस्कार भरते हैं, विष्णु की नाईं उनका पोषण करते हैं और शिवजी की नाईं हमारे कुसंस्कारों एवं जीवभाव का नाश करते हैं, वे हमारे गुरु हैं। फिर भी ऋषियों को संतोष नहीं हुआ अतः उन्होंने …

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यकृत चिकित्सा


यकृत-चिकित्सा के लिए अन्य कोई भी चिकित्सा-पद्धतियों की अपेक्षा आयुर्वेद श्रेष्ठ पद्धति है। आयुर्वेद में इसके सचोट इलाज हैं। यकृत संबंधी किसी भी रोग की चिकित्सा निष्णात वैद्य की देखरेख में करवानी चाहिए। कई रोगों में यकृत (Liver) की कार्यक्षमता कम हो जाती है। यकृत की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए आयुर्वैदिक औषधियाँ अत्यन्त उपयोगी हैं। …

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