ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

मन को कैसे जीतें ?


परम पूज्य संत श्री आसारामजी बापू जितने बड़े व्यक्ति को हराया जाता है, उतना ही जीत का महत्त्व बढ़ जाता है। मन एक शक्तिशाली शत्रु है। उसे जीतने के लिए बुद्धिपूर्वक यत्न करना पड़ता है। मन जितना शक्तिशाली है, उस पर विजय पाना भी उतना ही महत्त्वपूर्ण है। मन को हराने की कला जिस मानव …

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बिना दवा स्मरणशक्ति का विकास


पूज्यपाद संत श्री आसारामजी बापू परब्रह्म परमात्मा में सोलह कलाएँ होती हैं। सृष्टि में प्रत्येक वस्तु तथा जीव उन सोलह कलाओं में से कुछ कलाओं के साथ जीवित अथवा स्थित रहते हैं। अलग-अलग वस्तुओं तथा जीवों में ईश्वर की अलग-अलग कलाएँ विकसित होती हैं। उन कलाओं में एक विशेष कला है – स्मृतिकला। स्मृतिकला तीन …

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निंदा से कोढ़ नाश ! – पूज्यपाद संत श्री आसारामजी बापू


मृत्यु के भय से तो मृत्यु तो बढ़िया है और बदनामी के भय से बदनामी अच्छी है। ʹबदʹ होना बुरा नहीं है। इक्ष्वाकु कुल के राजा को कोढ़ की बीमारी हो गयी। दिन का चैन और रात की नींद हराम हो गयी। सारे हकीम और वैद्य अपना-अपना इलाज आजमाकर थक चुके थे। आखिर वह राजा …

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