ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

आत्मबल ही वास्तविक बल है


पूज्यपाद संत श्री आसारामजी बापू जो बलवान है, प्राणशक्ति से युक्त है उसके लिए पराये भी अपने हो जाते हैं जबकि दुर्बलों के लिए अपने भी पराये हो जाते हैं। वीरभोग्या वसुन्धरा। बल ही जीवन है। निर्बलता ही मौत है। समस्त बलों का उदगमस्थल है आत्मा। आत्मा के कारण ही सब प्रिय लगता है और …

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अनेक में एक – पूज्यपाद संत श्री आसारामजी बापू


वेदांत के ज्ञान की महिमा अमाप है। वेदांत का ज्ञान सुनने से जितना पुण्य होता है उतना पुण्य चांद्रायण व्रत रखने से या पैदल यात्रा करके पृथ्वी की प्रदक्षिणा करने से या अश्वमेध यज्ञ करने से भी नहीं होता है। किसी आश्रम में कोई नया साधक गुरुजी के दर्शन-सत्संग के लिए आ पहुँचा। उस साधक …

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उदारात्मा जयदेव जी महाराज


पूज्यपाद संत श्री आसारामजी बापू श्रीमद् भगवद् गीता में आता हैः दुःखेश्वनुद्विमग्नाः सुखेषु विगतस्पृहः। वीतरागभयक्रोधः स्थितधीर्मुनिरूच्यते।। ʹदुःखों की प्राप्ति में जिसका मन उद्वेगरहित है और सुखों की प्राप्ति में जिसकी स्पृहा दूर हो गयी है तथा जिसके राग, भय और क्रोध नष्ट हो गये हैं, ऐसा मुनि स्थिरबुद्धि कहा जाता है।ʹ (गीताः 2.56) सुख में …

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