यह बुद्धिमत्ता है-पूज्य बापू जी
जिस विद्या से तुम्हारे चित्त में विश्रांति नहीं, जिस विद्या से तुम्हें भीतर का रस नहीं आ रहा है वह विद्या नहीं है, वह बुद्धि नहीं है, वे सूचनाएँ हैं । बुद्धि तो वह है जिससे तुम्हारा हृदय इतना सुंदर-सुकोमल हो जाय कि दूसरों के सुख में तुम्हें सुख महसूस होने लगे, दूसरों के सुख …