Gurubhaktiyog

गुरु से अपनी गलतियों की माफी माँगते बुल्लेशाहजी के जज्बात-ए-दिल (भाग-2)


कल हमने सुना कि कैसे इनायत शाह बुल्लेशाह से बिना बात किए ही अपने कुटीर की तरफ चल देते हैं । बुल्लेशाह भी रोता हुआ गुरु के कुटीर के सामने जा खड़ा होता है । बुल्लेशाह की एक-2 धड़कन अपनी नादानी को कोस रही थी । बिल्कुल हिम्मत नहीं थी गुरुदेव के करीब जाने की, …

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गुरु से अपनी गलतियों की माफी माँगते बुल्लेशाहजी के जज्बात-ए-दिल (भाग- 1)


गुरु और शिष्य के बीच जो शक्ति जोड़ने का काम करती है वह शुद्ध प्रेम होना चाहिए । नम्रता, स्वेच्छा-पूर्वक, संशय-रहित होकर बाह्य आडंबर के बिना द्वेष रहित बनकर असीम प्रेम से अपने गुरु की सेवा करो । बुल्लेशाह एक ऐसा अफसाना है, एक ऐसा तराना है जिसे आज भी प्रेम की महफिलों में गाया …

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धर्म की रक्षा के लिए किया प्राणों का बलिदान


भगवत्प्राप्त महापुरुष परमात्मा के नित्य अवतार हैं । वे नश्वर संसार व शरीर की ममता को हटाकर शाश्वत परमात्मा में प्रीति कराते हैं । कामनाओं को मिटाते हैं। निर्भयता का दान देते हैं । साधकों-भक्तों को ईश्वरीय आनन्द व अनुभव में सराबोर करके जीवन्मुक्ति का पथ प्रशस्त करते हैं ।ऐसे उदार हृदय, करुणाशील, धैर्यवान सत्पुरुषों …

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