बस एक अशुद्ध विचार ने शिष्य को डाला महान संकट में….
गुरु के वचन और ईश्वर में श्रद्धा रखना यह सत्वगुण की निशानी है। गुरु इस पृथ्वी पर साक्षात ईश्वर है, सच्चे मित्र एवं विश्वासपात्र बन्धु है। हे भगवान! हे भगवान! मैं आपके आश्रय में आया हूँ, मुझ पर दया करो, मुझे जन्म मृत्यु के सागर से बचाओ ऐसा कहकर शिष्य को अपने गुरु के चरण …