ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

फास्ट युग में फास्ट प्रभुप्राप्ति हेतु…. पूज्य बापू जी


आज के इस फास्ट युग में जैसे हम भोजन पकाने, कपड़े धोने, यात्रा करने, संदेश भेजने आदि व्यावहारिक कार्यों में फास्ट हो गये हैं, वैसे ही क्यों न हम प्रभु का आनंद, प्रभु का ज्ञान पाने में भी फास्ट हो जायें ? पहले का जीवन शांतिप्रद जीवन था इसलिए सब काम शांति से, आराम से …

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असम्भव-से कार्य भी हो जाते हैं सम्भव, कैसे ?


सन् 1809 में फ्रांस में एक बालक का जन्म हुआ, नाम रखा गया लुई । एक दिन खेल-खेल में उसकी आँख में चोट लग गयी और एक आँख की रोशनी चली गयी । कुछ दिनों के बाद उसकी दूसरी आँख भी खराब हो गयी । उसका दाखिला दृष्टिहीनों के विद्यालय में करा दिया गया । …

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सत्य-पथ के साधकों के लिए वेद भगवान का संदेश


मा त्वा मूरा अविष्यवो मोपहस्वान आ दभन् । माकीं ब्रह्मद्विषो वनः ।।* ‘( हे मेरे आत्मन् हे मेरे मन !) तुझे मूढ़, अपनी पालना (केवल अपने शरीर, इन्द्रियों की तृप्ति) चाहने वाले स्वार्थ-पीड़ित लोग नष्ट न करें दबा न दें और उपहास करने वाले, मखौल उड़ाने वाले लोग भी दबा न दें । तू ब्रह्मज्ञान …

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