ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

महापुरुषों का दृष्टिकोण


शरीर की सार्थकता एक दिन श्री रमण महर्षि के एक भक्त ने उन्हें आश्रमवासियों हेतु पत्तल बनाते हुए देखा। भक्त ने महर्षि से पूछाः “आप पत्तल बनाने का यह छोटा सा काम कर रहे हैं ! क्या यह समय का अपव्यय नहीं है ?” महर्षि बोलेः “बेटे ! ऊँचा उद्देश्य सामने रखकर उचित मार्ग से …

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नीच मनुष्यों का संग न करें !


साँईं श्री लीलाशाह जी की अमृतवाणी जैसे धुआँ सफेद मकान को भी काला कर देता है, वैसे ही कुसंगी मनुष्य अच्छे मनुष्य को भी बिगाड़ देता है। ‘सत्संग तारता है, कुसंग डुबोता है।’ यह सच ही है। भँवरी एक कीड़े को लाकर अपने घर में बंद कर देती है। थोड़े दिनों के पश्चात कीड़ा उसके …

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कार्तिक मास के पुण्य-प्रभाव से गुणवती बनी भगवत्पत्नी


(कार्तिक मास व्रतः 5 अक्तूबर से 4 नवम्बर) कार्तिक मास की बड़ी महिमा है। पद्म पुराण (उ. खं. 120,23) में भगवान महादेव जी कार्तिकेय जी से कहते हैं- न कार्तिकसमो मासः…… ‘कार्तिक के समान कोई मास नहीं है।’ एक बार भगवान श्रीकृष्ण की पत्नी सत्यभामा ने श्रीकृष्ण से पूछाः “प्राणनाथ ! मैंने पूर्वजन्म में कौनसा …

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