ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

तेरी मर्जी पूरण हो


पूज्य बापूजी के सत्संग-प्रवचन से आत्मा अचल है, परमात्मा अचल है । तुम अचल से मिलो । तुम तिनके की नाईं अपने को कितना बहा रहे हो – जरा सा मनचाहा नहीं हुआ तो अशांति…. जरा विकार को पोषण नहीं मिला तो अशांति…. जरा सा अहं को पोषण नहीं मिला तो अशांति, दुःख…. जरा सा …

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उद्देश्य और आश्रय


पूज्य बापू जी के सत्संग-प्रवचन  से संसार को अनित्य, बदलने वाला जानो और भगवान को नित्य, सदा रहने वाला मानो । संसार दुःखालय है । संसार शत्रु देकर तपाता है और मित्र देकर भी दुःख देता है । मित्र मिला और वह बीमार हो तो दुःख देगा । मित्र चिढ़ गया तो दुःख देगा । …

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किसके साथ कैसा व्यवहार ?


पूज्य बापू जी के सत्संग-प्रवचन से आपको व्यवहार काल में अगर भक्ति में सफल होना है तो तीन बातें समझ लोः 1 अपने साथ पुरुषवत् व्यवहार करो । जैसे पुरुष का हृदय अनुशासनवाला, विवेकवाला होता है, ऐसे अपने प्रति तटस्थ व्यवहार करो । कहीं गलती हो गयी तो अपने मन को अनुशासित करो । 2 …

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