ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

निष्काम कर्मयोग


एक बार श्री रमण महर्षि से ‘वूरीज कॉलेज, वैलोर’ के तेलगु पंडित श्री रंगचारी ने निष्काम कर्म-विषयक जानकारी के लिए जिज्ञासा प्रकट की । महर्षि ने कोई उत्तर नहीं दिया । कुछ समय पश्चात महर्षि पर्वत पर घूमने गये । पंडित सहित कुछ अन्य व्यक्ति भी उनके साथ थे । मार्ग में एक काँटेदार लकड़ी …

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नरक पावे सोई


भगवत्पाद पूज्य श्री लीलाशाह जी महाराज मानव बनो, मानवता के गुण सीखो और प्राप्त करो । इन्सान वह है जो सबका भला सुने और करे । मीरा ने कहाः जो निंदा करे हमारी, नरक पावे सोई । आप जाये नरक में, पाप हमारे धोई ।। अपने को तो पहचाना नहीं और दूसरों की पहचान करने …

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मनुष्य दुःखी क्यों है ?


पूज्य बापू जी के सत्संग-प्रवचन से मनुष्य को अपने चित्त को किसी भी परिस्थिति व प्रसंग में दुःखी नहीं होने देना चाहिए । अगर चित्त दुःखी हुए बिना नहीं रहता है तो भगवान के चरणों में प्रार्थना करनी चाहिए कि ‘हे प्रभु ! इस दुःखरूप संसार से बचाकर हमें आत्मज्ञान के प्रकाश की ओर ले …

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