ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

तीव्र विवेक


संत श्री आसाराम जी बापू के सत्संग-प्रवचन से विवेक किसको बोलते हैं ? दो चीजें मिल गयी हों, मिश्रित हो गयी हों उनको अलग करने की कला का नाम है विवेक। परमात्मा चेतन है, जगत जड़ है और दोनों के मिश्रण से सृष्टि चलती है। सृष्टि में सुख-दुःख, लाभ-हानि, अच्छा-बुरा, जीवन-मरण ये सब मिश्रित हो …

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तब लग दोनों एक हैं….


संत श्री आसाराम जी बापू के सत्संग प्रवचन से गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज ने कहा हैः काम क्रोध अरू लोभ मोह की जब लग मन में खान। तब लग दोनों एक हैं क्या मूरख अरु विद्वान।। कोई अनपढ़, गँवार और मूर्ख हो एवं अध्यात्मविद्या से अनजान हो अथवा कोई अध्यात्म विद्या का बड़ा जानकार हो, …

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उद्देश्य ऊँचा बनायें


(उच्च कोटि के साधकों के लिए) संत श्री आशाराम जी के सत्संग प्रवचन से धन जोबन का करे गुमान वह मूरख मंद अज्ञान। धन, यौवन, पद, विद्या, चतुराई, प्रमाणपत्र का जो गुमान करता है वह मूर्ख है, अज्ञानी है। जब तक तू ब्रह्मवेत्ता की तराजू में सही नहीं उतरता तब तक जीवात्मा है और जीवात्मा …

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