ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

निःस्वार्थ सेवा


संत श्री आसारामजी बापू के सत्संग-प्रवचन से सृष्टि की उत्पत्ति के विषय में हमारे शास्त्र कहते हैं कि जब भगवान नारायण के नाभिकमल से ब्रह्माजी का प्रागट्य हुआ तब ब्रह्माजी दिग्मूढ़ की स्थिति में पड़ गये। वे समझ नहीं पा रहे थे किः ʹमेरा प्रादुर्भाव क्यों हुआ ? मुझे क्या करना है ?ʹ तभी आकाशवाणी …

Read More ..

ध्यान का रहस्य


संत श्री आसारामजी बापू के सत्संग-प्रवचन से ध्यान माने क्या ? हमारा मन नेत्रों के द्वारा जगत में जाता है, सबको निहारता  है तब जाग्रतावस्था होती है, ʹहिताʹ नाम की नाड़ी में निहारता है तब स्वप्नावस्था होती है और जब हृदय में विश्रांति करता है तब सुषुप्तावस्था होती है। ध्यानावस्था न जाग्रतावस्था है, न स्वप्नावस्था …

Read More ..

अहंकार का स्वरूप


संत श्री आसारामजी बापू के सत्संग प्रवचन से ʹश्री योगवाशिष्ठ महारामायणʹ मैं आता हैः ʹसंसार में जितने भी दुःख हैं वे सब अहंकार के कारण ही उत्पन्न होते हैं। अहंकार के कारण ही जीव का जन्म-मरण होता है और अहंकार के कारण ही राग-द्वेष होता है। अहंकार के त्याग से सब दुःखों का त्याग हो …

Read More ..