ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

प्रेम को किसमें लगायें ? – पूज्य बापू जी


संत कबीर जी ने कहा हैः जा घट प्रेम न संचरै, सो घट जान मसान । जैसे खाल लुहार की, साँस लेत बिन प्रान ।। गुरु गोविंदसिंह जी कहते हैं- साचु कहौ सुन लेहु सभै जिन प्रेम किओ तिन ही प्रभु पायो ।। जिसने प्रेम किया उसी ने पिया को, प्रभु को पाया । अकड़ …

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देर-सवेर अपने स्वरूप की ओर वापस लौटना ही पड़ेगा !


आजकल कई लोग विज्ञान-विज्ञान… आधुनिकता-आधुनिकता… करके जीवन की वास्तविकता को प्रकटाने वाली आत्मविद्या से दूर होकर अपनी असीम शक्तियों और सच्चे आनंद से अनजान रहते हैं । अपने वास्तविक कर्तव्यपालन की ओर ध्यान नहीं देते और मनमाने अधिकारों के लिए किसी भी हद तक उतरने को तैयार हो जाते हैं । ऐसे लोग शरीर की …

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जैसा चिंतन वैसा जीवन – पूज्य बापू जी


एक लड़का था । उसको डॉक्टर बनने की धुन चढ़ी, यह अक्ल नहीं थी कि डॉक्टर बनने के बाद भी आखिर क्या ! वह 12वीं कक्षा पास करके मेडिकल क्षेत्र में जाना चाहता था तो उस क्षेत्र की किताबें उसने पढ़ना चालू कर दिया । जैसा पढ़ते हैं न, वैसा चिंतन होता है । तो …

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