ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

पूज्यश्री का प्रसाद संजीवनी है


ऐसा कहा जाता है कि जो काम दवा से नहीं होता वह दुआ से हो जाया करता है। लेकिन मेरा अनुभव तो यह कहता है कि दुआ के साथ-साथ पूज्यश्री के हाथों से यदि प्रसाद मिल जाय तो हमारी दुआ भी स्वीकार हो जाती है। मैं विगत 23 वर्षों से दमा का मरीज था और …

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निरावरण तत्त्व की महिमा


पूज्यपाद संत श्री आसारामजी बापू तत्त्वदृष्टि से जीव और ईश्वर एक है, फिर भी भिन्नता दिखती है। क्यों ? क्योंकि जब शुद्ध चैतन्य में स्फुरण हुआ तब अपने स्वरूप को भूलकर जो स्फुरण के साथ एक हो गया, वह जीव हो गया परन्तु स्फुरण होते हुए भी जो अपने स्वरूप को नहीं भूले, अपने को …

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निरंजन वन में साधु अकेला खेलता है…


पूज्यपाद संत श्री आसारामजी बापू कबीर जी कहते हैं- निरंजन वन में साधु अकेला खेलता है….. बख्खड़ ऊपर गौ वीयाई उसका दूध बिलोता है।। मक्खन मक्खन साधु खाये छाछ जगत को पिलाता है। निरंजन वन में साधु अकेला खेलता है… निरंजन वन में…. अंजन माने इन्द्रियाँ। जहाँ इन्द्रियाँ न जा सके वह है निरंजन। उस …

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