ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

करो सेवा मिले मेवा….


पूज्यपाद संत श्री आसारामजी बापू बड़ौदा में गायकवाड़ का राज्य था। उनके कुल की महिला शांतादेवी स्वामी शांतानंद जी के दर्शन करने गयी। आश्रम में जाकर उन्होंने देखा कि एक व्यक्ति गौशाला में सफाई कर रहा है। शांतादेवी ने उससे कहाः “मुझे पूज्य गुरुदेव के दर्शन करने हैं।” उसने कहाः “यहाँ कोई गुरुदेव नहीं रहते।” …

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जहँ राम तहँ नहीं काम….


पूज्यपाद संत श्री आसारामजी बापू मन की पाँच अवस्थाएँ होती हैं- क्षिप्त, विक्षिप्त, मूढ़, एकाग्र और निरूद्ध। क्षिप्त, विक्षिप्त और मूढ़ ये आम मन की अवस्थाएँ हैं एवं एकाग्र और निरूद्ध ऊँचे मन की अवस्थाएँ हैं। भारत के ऋषि-मुनियों ने एकाग्र और निरूद्ध मन का अनुसंधान करके ही समाधिसुख पाया है, दिव्य सृष्टि का अनुभव …

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हृदय रोगों में अत्यन्त प्रभावशाली योग


अर्जुन की ताजा छाल को छाया में सुखाकर चूर्ण बनाकर रख लें। 200 ग्राम दूध में 200 ग्राम ही पानी मिलाकर हल्की आग पर रखें व उपरोक्त तीन ग्राम अर्जुन छाल का चूर्ण मिलाकर उबालें। जब उबलते-उबलते द्रव्य आधा रह जाय तब उतार लें। थोड़ा ठंडा होने पर छानकर रोगी को पिलाने से सम्पूर्ण हृदयरोग …

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