ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

असीम ईश्वरीय सुख की प्राप्ति


पूज्यपाद संत श्री आसारामजी बापू तन सुकाय पिंजर कियो धरे रैन दिन ध्यान। तुलसी मिटे न वासना बिना विचारे ज्ञान।। तप करना, तन को सुखाना, तितिक्षा सहना, इनसे परमात्मप्राप्ति नहीं होती। तप से शक्ति तो प्राप्त होती है और पुण्य से उत्कृष्ट भोग प्राप्त होते हैं किन्तु अमरत्व की, परमात्मप्रेम की प्राप्ति नहीं होती और …

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सनातन धर्म


ज्ञान-प्रेम-माधुर्य का महासागर पूज्यपाद संत श्री आसारामजी बापू दुनिया के हर प्राचीन धर्म ने, दुनिया के हर सुलझे हुए संप्रदाय और कई प्रबुद्ध महापुरुषों ने और राजा-महाराजाओं ने जिसका सहर्ष स्वीकार किया और अनुभूतियाँ की हैं, सारी पृथ्वी पर, अतल, वितल, महातल, रसातल, स्वर्गलोक, भूर्लोक, भूवर्लोक, जनलोक, तपलोक पर जिसका साम्राज्य छाया हुआ है वह …

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पूर्ण जीवन के तीन सूत्र


प्रशान्ति-निर्भयता-ब्रह्मचर्यव्रत पूज्यपाद संत श्री आसारामजी बापू नानक जी ने कहा हैः पूरा प्रभु आराधिया पूरा जा का नाँव। नानक पूरा पाइया, पूरे के गुन गाँव।। जब तक पूरे प्रभु का ज्ञान नहीं मिलता, पूरे प्रभु की आराधना नहीं होती, ʹपूरे प्रभु के साथ अपना नित्य संबंध हैʹ ऐसा अनुभव नहीं होता तब तक अपूर्ण प्रकृति …

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