ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

असावधानी से की हुई भलाई बुराई का रूप ले लेती है – पूज्य बापू जी


हकीकत में हम इतने महान हैं कि उसका  वर्णन करने लिए शारदा जी बैठें तो थक जायेंगी किंतु हमारी महानता पूरी नहीं होगी । हर मनुष्य इतना महान है । जैसे हर बीज में अनन्त वृक्ष छुपे हैं ऐसे ही हर जीव में अनन्त शिवत्व का सामर्थ्य छुपा है लेकिन अपनी अक्ल नहीं और शास्त्रों …

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ब्रह्मवेत्ता संत ने क्यों किये 3 कुटियाओं को प्रणाम ?


एक राजकुमार ने संसारी सुखों की पोल जान ली कि ‘यह जवानी है दीवानी । भोग भोगे लेकिन अंत में, बुढ़ापे में तो कुछ नहीं…. और जिस शरीर से भोग भोगे वह तो जल जायेगा ।’ उस बुद्धिमान राजकुमार ने साधुताई की दीक्षा ले ली । फिर वह अपने गुरु के साथ यात्रा कर रहा …

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परमात्मा की कृपा और प्रसन्नता कैसे पायें ? – साँईं श्री लीलाशाह जी महाराज


यह अभिमान न आना चाहिए कि ‘मैंने दूसरों का कोई उपकार किया है । ‘ ऐसा समझना चाहिए कि जो कुछ उन्हें दिया जाता है वह उनके लिए ही प्राप्त हुआ है । जैसे कोई डाकिया डाकघर से प्राप्त की गयी वस्तुएँ, पार्सल आदि लिखे पते पर लोगों को पहुँचाता है परंतु इसलिए उन पर …

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