ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

नित्य उपासना की आवश्यकता क्यों ?


‘ऋग्वेद’ (1.113.11) में कहा गया हैः ईयुष्टे ये पूर्वतरामपश्यन्व्युच्छन्तीमुषसं मर्त्यासः। अस्माभिरू नु प्रतिचक्ष्याभूदो ते यन्ति ये अपरीषु पश्यान् ।। ‘जो मनुष्य ऊषा के पहले शयन से उठकर आवश्यक (नित्य) कर्म करके परमेश्वर का ध्यान करते हैं वे बुद्धिमान और धर्माचरण करने वाले होते हैं । जो स्त्री-पुरुष परमेश्वर का ध्यान करके प्रीति से आपस में …

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क्यों होती हैं महामारियाँ ?


आयुर्वेद के ग्रंथ चरक संहिता (विमान स्थानः 3.6) के अनुसार एक ही समय में, एक ही समान लक्षणों वाले तथा अनेक लोगों का विनाश करने वाले रोगों का उदय वायु, जल, देश (स्थान) और काल के विकृत करने से होता है । 1. विकृत वायुः ऋतु-विपरीत बहने वाली अति निश्चल या वेगवाली, अति शीत या …

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महामारी ने इतने नहीं मारे तो किसने मारे ? – पूज्य बापू जी


आप अपने अंतःकरण में द्वेषरहित, अपराधरहित, विकाररहित अवस्था में विश्राम करो फिर जो होगा देखा जायेगा । मैं कई बार कह चुका हूँ, आप अंदर में पक्का संकल्प करो । कोई भी विचित्र परिस्थिति आ जाय, कोई भी कठिन परिस्थिति आ जाय, कोई भी मुसीबत आ जाय – तैयार रहो भीतर से । मुसीबत की …

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