वर्षा ऋतु में आहार विहार
वर्षा ऋतु से ʹआदानकालʹ समाप्त होकर सूर्य ʹदक्षिणायनʹ हो जाता है और ʹविसर्गकालʹ शुरु हो जाता है। इन दिनों में हमारी जठराग्नि अत्यंत मंद हो जाती है। वर्षाकाल में मुख्यरूप से वात दोष कुपित रहता है। अतः इस ऋतु में खान-पान तथा रहन सहन पर ध्यान देना अत्यंत जरूरी हो जाता है। गर्मी के दिनों …