ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

वर्षा ऋतु में आहार विहार


वर्षा ऋतु से ʹआदानकालʹ समाप्त होकर सूर्य ʹदक्षिणायनʹ हो जाता है और ʹविसर्गकालʹ शुरु हो जाता है। इन दिनों में हमारी जठराग्नि अत्यंत मंद हो जाती है। वर्षाकाल में मुख्यरूप से वात दोष कुपित रहता है। अतः इस ऋतु में खान-पान तथा रहन सहन पर ध्यान देना अत्यंत जरूरी हो जाता है। गर्मी के दिनों …

Read More ..

शक्ति का सदुपयोग करो


पूज्यपाद संत श्री आसारामजी बापू हमारे अंदर तीन शक्तियाँ मौजूद हैं- करने की शक्ति, मानने की शक्ति और जानने की शक्ति। बच्चा जब थोड़ा सा समझने लायक होता है तब पूछता हैः “यह क्या है ?… वह क्या है ?….ʹ बच्चा माता-पिता, भाई-बहन सबसे पूछता है क्योंकि जानने की शक्ति उसमें मौजूद है। मनुष्य इस …

Read More ..

सदगुरु महिमा


पुज्यपाद संत श्री आसारामजी बापू भगवान से कुछ माँगो मत। माँगने से देने वाले की अपेक्षा तुम्हारी माँगने की वस्तु का महत्त्व बढ़ जाता है। ईश्वर और गुरु माँगी हुई चीजें दे भी देते हैं किन्तु फिर अपना-आपा नहीं दे पाते। बलि ने भगवान वामन से कह दियाः “प्रभु ! आप जो चाहे ले सकते …

Read More ..