पयाहारी बाबा
पूज्यपाद संत श्री आसारामजी बापू दुनियादार जहाँ सिर पटकते हैं। वहाँ आशिक कदम रखते हैं।। भोगी जिस संसार के पीछे आँखें मूंदकर अँधी दौड़ लगाता है, वह संसार उसका कभी नहीं होता। संसार उसे सुख तो नहीं देता वरन् देता है मुसीबतें, जिम्मेदारियाँ, तनाव और अशांति। जबकि योगी, भक्त या सेवक सेव्य को प्रसन्न करने …