ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

मंत्र-विद्या के मूल तत्त्व


शास्त्रों में सर्वत्र यही निर्देश दिया गया है कि श्रद्धा, धैर्य और गुरुभक्ति ये तीन तत्त्व साधना – यात्रा के अनिवार्य सम्बल हैं और साधना प्रणाली के सहायक तत्त्व हैं – भक्ति, शुद्धि, आसन, पंचांग सेवन, आचार, धारण, दिव्य देश-सेवन, प्राणक्रिया, मुद्रा, तर्पण, हवन, बलि, योग, जप, ध्यान तथा समाधि। इन तत्त्वों की महत्ता इस …

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पीपक मुनि और ब्रह्मा जी


कश्यप कुल में एक कुमार था, जिसका नाम था पीपक। वह तपस्या का बड़ा धनी। मात्र 15 वर्ष की अवस्था में ही वह ‘पीपक मुनि’ होकर पूजा जा रहा था। दूर-दूर से बड़े-बड़े सेठ-साहूकार उसके दर्शनों के लिए आते थे। यहाँ तक कि बड़े-बड़े राजा-महाराजा भी पीपक मुनि के दर्शन करके अपने को भाग्यशाली मानते …

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दो प्रकार का जगत


संत श्री आसाराम जी बापू के सत्संग प्रवचन से सारा जगत मन की कल्पना से उत्पन्न हुआ है और उसी में फँसा हुआ है। मन की कल्पना सुख बनाती है तब सुखी हो जाते हैं और मन की कल्पना दुःख बनाती है तब दुःखी हो जाते हैं। परंतु जब मन की कल्पना दिखती है, जीव …

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